Propose Day Shayari

Propose day shayari

क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता,आँसू की तरह आँख तक आ भी नहीं सकता।
पिरो दिये मेरे आँसू हवा ने शाखों में,भरम बहार का वाकी रहा आँखों में।
अजीब कहर पड़ा अब के साल अश्कों का,कि आँख तर ना हुई खूं में नहा कर भी।
जाहिर नहीं करता पर मैं रोज रोता हूँ,शहर का दरिया मेरे घर से निकलता है।
इस शहर-ए-बे-चराग में जाएगी तू कहाँ,आ ऐ शब-ए-फिराक़ तुझे घर ही लें चलें।
बहुत अजीब हैं तेरे बाद की ये बरसातें भी,हम अक्सर बन्द कमरे में भीग जाते हैं।
तू इश्क की दूसरी निशानी दे दे मुझको,आँसू तो रोज गिर कर सूख जाते हैं।
निकल जाते हैं तब आँसू जब उनकी याद आती है,जमाना मुस्कुराता है मोहब्बत रूठ जाती है।
इनको न कभी आँख से गिरने देता हूँ,उनको लगते हैं मेरी आँख में प्यारे आँसू।
आ देख मेरी आँखों के ये भीगे हुए मौसम,ये किसने कह दिया कि तुम्हें भूल गये हम।

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