Desh Bhakti Shayari

Desh Bhakti Shayari

किसी को लगता हैं हिन्दू ख़तरे में हैं ,
किसी को लगता मुसलमान ख़तरे में हैं ,
धर्म का चश्मा उतार कर देखो यारों ,
पता चलेगा हमारा हिंदुस्तान ख़तरे में हैं .

मैं जला हुआ राख नही , अमर दीप हूँ ,
जो मिट गया वतन पर , मैं वो शहीद हूँ .

जो अब तक ना खौला वो खून नही पानी हैं ,
जो देश के काम ना आये वो बेकार जवानी हैं

फना होने की इज़ाजत ली नहीं जाती
ये वतन की मोहब्बत है जनाब …
पूछ के नहीं की जाती .

चाहता हूँ कोई नेक काम हो जाए ,
मेरी हर साँस देश के नाम हो जाए .

भारत का वीर जवान हूँ मैं ,
ना हिन्दू , ना मुसलमान हूँ मैं ,
जख्मो से भरा सीना हैं मगर ,
दुश्मन के लिए चट्टान हूँ मैं ,
भारत का वीर जवान हूँ मैं .

है नमन उनको कि जो यशकाय को अमरत्व देकर ,
इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं ,
है नमन उनको जिनके सामने बौना हिमालय ,
जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गये हैं .

उन आँखों की दो बूंदों से सातों सागर हारे हैं
जब मेहँदी वाले हाथों ने मंगल – सूत्र उतारे हैं

कुछ पन्ने इतिहास के
मेरे मुल्क के सीने में शमशीर हो गएँ ,
जो लड़े , जो मरे वो शहीद हो गएँ ,
जो डरे , जो झुके वो वजीर हो गएँ ,

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