Armaan Shayari

Armaan shayari

ये आरजू नहीं की किसी को भुलाए हम,
ना तमन्ना की किसी को रुलाए हम,
पर दुआ है रब से इतनी की,
जिसको जितना याद करते है उसको
उतना याद आये हम..

आज़ादी के सूरज को आज गृहण क्यूँ
लग गया?ये गुलामी का दिया क्यूँ फिर
से आज जग गया,आज बैठे हम बन चूहे
अपने बिल में हैं,सरफ़रोशी की तमन्ना
आज किसके दिल में है?

यादो में न ढूंढो हमे,मन में हम बस
जायेंगे.तमन्ना हो अगर मिलने
की,तो हाथ रखो दिल पर.हम
धड़कनों में मिल जायेंगे.

लगे ना नज़र इस रिश्ते को ज़माने
की,पड़े ना ज़रूरत कभी एक दूजे को
मानने की,आप ना छोड़ना मेरा साथ
वरना तमन्ना ना रहेगी फिर दोस्त बनाने की.

अचानक वह नज़र जो आए तो,
पैमाने छलक गए जैसे, दिल के
अरमान भडक गए ऐसे तीर दिल के
आर पार भी हो,पर निशान नज़र न आए.

है तमन्ना फिर,मुझे वो प्यार पाने की दिल
है पाक मेरा ,ना कोशिश कर आज़माने
की जब एतबार है तुझे मेरा, और मुझे तेरी
वफाई का तो फिर क्यूँ करता है परबाह, ये
दिल ज़माने की.

तेरी आजादियाँ सदके सदके ।मेरी
बर्बादियाँ सदके सदके ।।मैं बर्बाद तमन्ना
हूँ ।मुझे बर्बाद रहने दो ।।

दिल में हर किसी का अरमान नहीं
होता ,हर कोई दिल का मेहमान नहीं
होता ,एक बार जिसकी आरजू दिल में
बस जाती है ,उसे भुला देना इतना आसान
नहीं होता !

पंछी थे डाल डाल के, जाने कहाँ गये अरमान
आँख ही को पत्थर थमा गये॥

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