Shayari

Ahmad Faraz Shayari

उसने मुझे छोड़ दिया तो क्या हुआ फ़राज़
मैंने भी तो छोड़ा था सारा ज़माना उसके लिए l
फुर्सत मिले तो कभी हमें भी याद कर लेना फ़रा
ज़बड़ी पुर रौनक होती हैं यादें हम फकीरों की
वो बाज़ाहिर तो मिला था एक लम्हे को फ़राज़
उम्र सारी चाहिए उसको भुलाने के लिए l
कभी हिम्मत तो कभी हौसले से हार गएहम बदनसीब थे जो हर किसी से हार गएअजब खेल का मैदान है ये दुनिया फ़राज़कि जिसको जीत चुके उसी से हार गए
मुहब्बत में मैंने किया कुछ नहीं लुटा दिया फ़राज़
उस को पसंद थी रौशनी और मैंने खुद को जला दिया l
मौसम का ऐतबार ज्यादा नहीं किया सो उसने हमसे प्यार ज्यादा नहीं कियाकुछ तो फ़राज़ हमने पलटने में देर की कुछ उसने इंतज़ार ज्यादा नहीं किया
ये ही सोच कर उस की हर बात को सच माना है फ़राज़ के इतने खूबसूरत लब झूठ कैसे बोलते होंगे
उम्मीद वो रखे न किसी और से फ़राज़
हर शख्स मुहब्बत नहीं करता उसे कहना l
सवाब समझ कर वो दिल के टुकड़े करता है फ़राज़
गुनाह समझ कर हम उन से गिला नहीं करते l
वो बेवफा न था यूँ ही बदनाम हो गया फ़राज़
हजारों चाहने वाले थे वो किस किस से वफ़ा करते

Ahmad hindi shayari best 

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